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100 साल पुराना ब्रिटिश कर्ज: Sehore-Ruthia British Loan Case 1917 का पूरा सच

On: February 25, 2026 1:08 PM
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Sehore Ruthia family 1917 British loan case featured image collage

इतिहास अक्सर राजाओं और युद्धों की कहानियों तक सीमित रह जाता है, लेकिन मध्य प्रदेश के सीहोर (Sehore) जिले से जुड़ी एक ऐसी ऐतिहासिक दास्तां भी है, जो ब्रिटिश राज को कटघरे में खड़ा करती है। यह कहानी है Sehore-Ruthia British Loan Case 1917 की।

यह केवल एक कानूनी मुकदमा नहीं, बल्कि एक परिवार की विरासत, आत्मसम्मान और उस वादे की कहानी है जिसे समय भी धुंधला नहीं कर पाया। आज भी एक भारतीय परिवार ब्रिटेन सरकार से खरबों रुपये के दावे के साथ न्याय की प्रतीक्षा कर रहा है।

1. जब ब्रिटिश साम्राज्य को कर्ज की जरूरत पड़ी

साल 1917 में प्रथम विश्व युद्ध के दौरान ब्रिटेन भारी आर्थिक संकट से जूझ रहा था। सैनिकों की रसद, हथियार और युद्ध सामग्री के लिए बड़ी मात्रा में धन की आवश्यकता थी।

इसी दौरान सीहोर के सेठ जगन्नाथ (रुठिया परिवार के पूर्वज) का नाम सामने आता है। दावों के अनुसार, वे उस समय के एक संपन्न व्यवसायी और परोपकारी व्यक्ति थे, जिन्होंने ब्रिटिश सरकार को वित्तीय सहायता प्रदान की।

The Great Transaction

बताया जाता है कि सेठ जगन्नाथ ने ब्रिटिश सरकार को एक बड़ी राशि ऋण (Loan) के रूप में दी थी, जिसके बदले में उन्हें War Bonds और Promissory Notes जारी किए गए। ये दस्तावेज आज भी रुठिया परिवार के पास सुरक्षित होने का दावा किया जाता है।

1917 British War Loan document of Rs 35000 signed by WS Davis
वह मूल वॉर बॉन्ड जिस पर ब्रिटिश हुकूमत की मुहर और हस्ताक्षर मौजूद हैं।

2. करोड़ों से खरबों तक: Compound Interest का प्रभाव

इस केस की सबसे बड़ी चर्चा इसकी अनुमानित राशि को लेकर है।
1917 में दिया गया मूलधन (Principal Amount) उस समय करोड़ों में बताया जाता है।

बॉन्ड्स की शर्तों के अनुसार भुगतान में देरी होने पर चक्रवृद्धि ब्याज (Compound Interest) लागू होना था। पिछले 100 वर्षों में यही ब्याज राशि बढ़ते-बढ़ते आज हजारों अरब पाउंड (Trillions of Pounds) तक पहुंचने का दावा किया जाता है।

3. पीढ़ियों से चल रही कानूनी लड़ाई

रुठिया परिवार की तीन से चार पीढ़ियां इस मामले को लेकर संघर्ष कर रही हैं। परिवार का कहना है कि उन्होंने वर्षों तक दस्तावेजों को सुरक्षित रखा और विभिन्न सरकारी कार्यालयों में इस मामले को उठाया।

उनके लिए यह केवल आर्थिक दावा नहीं, बल्कि उनके पूर्वजों की ऐतिहासिक विरासत और सम्मान का प्रश्न है।

Vintage photo of Seth Jagannath and family at Rasuliya Ramnath Ginning Factory.
सेठ जगन्नाथ और उनकी ऐतिहासिक ‘रसूलिया रामनाथ जिनिंग फैक्ट्री’ की एक झलक।

4. कानूनी चुनौतियां और अंतरराष्ट्रीय बाधाएं

Sehore-Ruthia British Loan Case 1917 को सुलझाने में कई कानूनी अड़चनें सामने आई हैं:

  • Sovereign Immunity: अंतरराष्ट्रीय कानून के तहत किसी देश की सरकार को दूसरे देश की अदालत में पुराने ऋणों के लिए जवाबदेह ठहराना कठिन होता है।
  • Transfer of Power Act 1947: आजादी के समय भारत और ब्रिटेन के बीच वित्तीय देनदारियों का पुनर्वितरण किया गया था।
  • Archival Verification: लंदन के अभिलेखागार में इन War Bonds और Promissory Notes का सत्यापन एक जटिल प्रक्रिया है।

5. भारत सरकार और ब्रिटिश हाई कमीशन की भूमिका

रुठिया परिवार ने इस मामले को लेकर भारत सरकार, प्रधानमंत्री कार्यालय (PMO), विदेश मंत्रालय और दिल्ली स्थित ब्रिटिश हाई कमीशन से कई बार संपर्क किया है।

परिवार की मांग है कि इस मामले को State-to-State स्तर पर उठाया जाए, ताकि ऐतिहासिक वित्तीय दावे की निष्पक्ष जांच हो सके।

निष्कर्ष

Sehore-Ruthia British Loan Case 1917 आज भी न्याय की प्रतीक्षा में खड़ा है। यह मामला केवल धनराशि का नहीं, बल्कि ऐतिहासिक दस्तावेजों और एक परिवार की विरासत का प्रतीक है।

क्या भविष्य में ब्रिटेन इस कथित कर्ज को स्वीकार करेगा?
इसका उत्तर आज भी इतिहास के दस्तावेजों और कानूनी प्रक्रियाओं में लंबित है।

FAQ – Sehore-Ruthia British Loan Case 1917

1. Sehore-Ruthia British Loan Case 1917 क्या है?
Sehore-Ruthia British Loan Case 1917 एक ऐतिहासिक वित्तीय दावा है, जिसमें सीहोर के रुठिया परिवार का कहना है कि उनके पूर्वज सेठ जगन्नाथ ने 1917 में प्रथम विश्व युद्ध के दौरान ब्रिटिश सरकार को ऋण दिया था।

2. सेठ जगन्नाथ ने ब्रिटिश सरकार को किस रूप में धन दिया था?
दावों के अनुसार यह धन Loan के रूप में दिया गया था, जिसके बदले में War Bonds और Promissory Notes जारी किए गए थे।

3. इस केस में आज कितनी राशि का दावा किया जा रहा है?
परिवार के अनुसार मूलधन पर 100 वर्षों से अधिक समय तक लागू Compound Interest के कारण यह राशि बढ़कर हजारों अरब पाउंड तक पहुंच चुकी है।

4. यह मामला अब तक सुलझ क्यों नहीं पाया?
Sovereign Immunity, Transfer of Power Act 1947 और अंतरराष्ट्रीय कानूनी प्रक्रियाओं जैसी जटिल बाधाओं के कारण यह मामला अब तक लंबित है।

5. क्या ब्रिटेन सरकार ने इस ऋण को स्वीकार किया है?
अब तक ब्रिटेन सरकार की ओर से इस कथित ऋण की कोई आधिकारिक स्वीकृति सार्वजनिक रूप से सामने नहीं आई है।

डिस्क्लेमर: यह लेख ऐतिहासिक दावों और संबंधित परिवार द्वारा उपलब्ध कराई गई जानकारी पर आधारित है। किसी भी कानूनी निर्णय के लिए आधिकारिक अभिलेखों और न्यायालय के आदेशों को ही अंतिम माना जाएगा।

Mohit Singh Tomar

My name is Mohit Singh Tomar, a passionate student and aspiring journalist from Morena, Madhya Pradesh. With a keen interest in news writing and digital media, I created Khabar Apke Dwar to deliver accurate, timely, and engaging news updates to readers across India. I strive to ensure that every headline reaches you with clarity, credibility, and commitment.

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